मंगलवार, 5 जुलाई 2016

अदरक द्वारा पेट संबन्धी रोगों का उपचार

अदरक द्वारा पेट संबन्धी रोगों का उपचार उपचार विधि :- ( 1 ) अदरक को कूटकर एक चम्मच रस निकाल ले । इस रस में एक चुटकी सेंधा नमक डालकर ऊँगली से धीरे - धीरे चाटे । एक साथ कभी न खाये बरना गला में खुश्की का फन्दा लगने का डर रहता है । एक एक बून्द चाटने से पेट में लार भी पहुँचेगी जो पेट में जलन को कम कर देती है परन्तु पाचन क्रिया को ठीक कर देती हैं । ( 2 ) भोजन के बाद एक चम्मच अदरक का रस एक ग्लास पानी में एक निम्बू के रस को डाल कर पी लें । इसे भोजन पचने में सहायता मिलती है और अपच नष्ट हो जायेगी ।

शनिवार, 2 जुलाई 2016

गले के टाँसिल के कारगर घरेलू उपचार

गले के टाँसिल के कारगर घरेलू उपचार 


अधिकांशतः सर्द - गर्म  या जाड़े के समय में गले में ठण्ड लग जाने से टॉन्सिल बढ़ जाता है ।टाँसिल के  ज्यादा बढ़ जाने पर खाने में प्रोबलेम होता है गला दर्द करने लगता है , कभी - कभी बुखार भी हो जाता है । गला सूज जाता है ।

उपचार

    प्रथम विधि :-   इसके लिए अदरक कुचल कर थोड़े से सरसो के तेल में गर्म इसे गले पर लेप कर मुलाय  कपड़ा से पट्टी बाँध ले । धीरे - धीरे  सारी सूजन ठीक हो जायेगी ।

         दूसरी विधि :- एक चुटकी अदरक के सोंठ , एक चुटकी हल्दी और एक पुती लहसुन को एक कप पानी में औंट कर पिजाये । इसे टाँसिल ठीक हो जाती है । अदरक का सोंठ त्वचा को सुखाने की काम करती है और हल्दी और लहसुन दर्द को ठीक करने का काम करता है ।

शुक्रवार, 1 जुलाई 2016

एसिडिटी या अम्ल पित्त ( गैस ) का अदरक द्वारा शर्तिया घरेलू उपचार

एसिडिटी या अम्ल पित्त ( गैस ) के रोग का अदरक द्वारा शर्तिया घरेलू उपचार


आजकल यह रोग घर - घर देखे जाने लगे है आयुर्वेद में एसिडिटी को अम्लपित्त कहते है । इस रोग में उदर में अम्ल के तत्व बढ़ जाते है तथा शरीर पर पित्त का प्रकोप होने लगता है । जो लोग गरिष्ठ भोजन , चाट - मसाले , खटाई अधिक मात्रा में खाते है वे लोग इस बिमारी के ज्यादा शिकार होते हैं । मानसिक कार्य करने वाले , देर तक बैठ क्र काम करने वाले , पाखाना - पेशाब देर तक रोकने वाले व्यक्ति भी इस रोग के शिकार हो जाते हैं। चिंता , दुःख , अशांति आदि कारण से भी व्यक्ति को गैस या एसिडिटी , अम्ल पित्त जैसा रोग होजाता है । यह रोग देखने में साधारण होता है पर यह रोग बहूत ही भयानक होता है ।

      लक्ष्ण -  ( 1 ) पेट में गैस बनना ,  ( २ )  त्वचा पर खुजली होना ( 3 ) पेट फूल जाना तथा बार - बार डकार आना ( 4 ) हाथ - पैरों  से पसीना आना ( 5 )  जब गैस की अधिकता हो जाती है तो बार बार डकार आती है एवं नींद नही आती है । ( 6 )  कभी कभी गैस की अधिकता के कारण गला घुटने लगता है ।


उपचार विधि - 

( 1 ) अदरक का सोंठ 25 ग्राम एवं सुखा धनिया 25 ग्राम । दोनों को महीन पीस कर दो कप पानी में आग पर रख दे । जब पानी पक कर एक कप हो जाए तो इसे दिन भर में तीन बार पियें । इसे पेट की सारी अम्ल निकल जायेगी ।

 ( 2 )  सोंठ 5 ग्राम धनिया10 ग्राम दोनों को पीस कर शहद के साथ दिन में तीन बार चाटे ।इसे प्रयोग से तीन चार दिनों में ही अम्ल या गैस छूमन्त्र हो जाता है ।

 परहेज :-  गरिष्ठ भोजन न खाये , खाली पेट न रहे इसके लिए समय पर भोजन करे ।भोजन में तेल , घी , मसाला का का प्रयोग ना मात्रा का ले । सुबह - शाम हरी घास पर टहले एवं हल्का व्यायाम करे ।