रविवार, 20 मार्च 2016

नीम -मधुमेह ( चीनी ) या डायबिटीज के बिमारी का दुश्मन है ।

नीम -मधुमेह ( चीनी ) या डायबिटीज के बिमारी का दुश्मन है ।

             इस बिमारी में रोगी को नीम की छाल की काढ़ा पीनी चाहिए । 50 ग्राम निम के छाल को एक कप पानी में औट ले ।आधा कप रह जाए तो इसे छान कर सुबह पीले । इस रोग में करेले की सब्जी लाभदायक होता है ।खान पान में सयंम रखे । मधुमेह में खजूर जरूर खानी चाहिए ।क्योंकि खजुर में मधुमेह को नष्ट करने की शक्ति होती है ।यधपि खजूर मीठा होता है पर खजूर में मधमेह को दूर करने के गुण पाये जाते है । अतः खजूर का सेवन सात्विक भोजन करने बाद ही करनी चाहिए । एक बार में 100 ग्राम से अधिक नही खानी चाहिये । खजूर खाने के बाद पानी नही पीनी चाहिए ।पर कुल्ला जरूर कर ले ।इस तरह कुछ दिनों तक नीम के काढ़े के सेवन से मधुमेह कन्ट्रौल हो जाता है ।

शनिवार, 19 मार्च 2016

कुष्ट रोग ( कोढ़ ) का नीम के प्रयोग से अचूक ईलाज ।

कुष्ट रोग ( कोढ़ ) का नीम के प्रयोग से अचूक ईलाज ।


नीम का पानी पीया जाय तो कुष्ठ रोग पास फटक नही सकता है ।आज भारत में लगभग तीस लाख से अधिक व्यक्ति कुष्ठ रोग से ग्रसित है ।ये लोग जब एलोपैथिक दवा करके हार गए उन्हें कुछ फायदा नही हुआ वे नीम का सहारा लिए और वे कुष्ठ रोग से निजात पा गए ।जिन लोगो को कुष्ट रोगों का शिकायत है उन्हें नीम का भपका - जल सेवन करना तथा कुष्ठ जनित अंगो पर लगाना चाहिये । चरक , सुश्रुत आदि आयुर्वेद के शाश्त्रो निम् को कुष्ठ रोग नाशक औषधि बताया है ।आज हजारो बैज्ञानिक निम पर तरह तरह के परीक्षण कर रहे है ताकि उनके हाथ कोई अनमोल मोती लग जाय और वे मानव जाती का उपकार कर सके । नीम का पानी रोज पिने से पेट का कीड़ा मर जाता है ।आज बैज्ञानिक मानने लगे है की निम् के जड़ से लेकर फुनगी तक अनमोल है ।
         
             कुष्ठ रोग को पहले छूत का रोग मानते थे पर आज साबित हो गया है कि कुष्ठ रोग छूत का रोग नही है ।यह त्वचा पर अपरजीवी जीवाणु के कारण होता है । कोढ़ का लक्ष्ण दिखाई देते ही रोगी को निम्नलिखित प्रयोग करनी चाहिए ।

 प्रयोग विधि :-

( 1 ) नीम के तेल से शरीर को मालिस करे ।

( 2 ) नीम के पत्ती के रस एक चम्मच प्रतिदिन सुबह ले ।

( 3 ) नीम के फूल को शहद के साथ चटनी की तरह चाटे ।

( 4 ) नीम की हरी सींकों को जलाकर उनकी राखो को नीम के तेल में मिलाकर कोढ़ वाले स्थान पर लगावे ।

( 5 ) नीम के फूल को पीसकर शर्बत में डालकर पिले ।इसे लगभग एक दो माह तक पिने से कोढ़ ठीक होने लगता है ।

( 6 ) नीम के गोंद को आंच पर पिघला ले । फिर इसे नीम की पत्तियो के रस में मिलाकर कोढ़ पर मिलाएं ।

( 7 ) नीम के पानी में रोज दो घण्टे तक हाथ पाँव को भिगोये रखे ।कुछ ही दिनों में कोढ़ ठीक होने लगेगा ।

शुक्रवार, 18 मार्च 2016

नीम के सेवन से हर्निया का नामोनिशान मिट जाती है 

नीम के सेवन से हर्निया का नामोनिशान मिट जाती है 


जिस व्यक्ति का अंडकोष बढ़ जाता है बोल चाल की भाषा में उसे हर्निया कहते है । अंडकोष के बढ़ जाने से बहुत ही तकलीफ होती है । यह रोग अनेक कारणों से होता है ।ज्यादतर यह रोग उन्ही लोगो को होता है जो लोग शरीर से मेहनत कम करते है आराम पसन्द होते है ।ज्यादतर यह रोग सेठ लोगो को होता है ।इसमें आंतो में विस्तार की स्थिति उत्पन्न हो जाती है ।इसे अंडकोष बढ़ने लगते है । इसके बढ़ जाने से असहनीय पीड़ा होता है ।इसके लिए नीम का सेवन करे तो सारा कष्ट दूर हो जाता है ।

प्रयोग विधि :- 

 नीम की पत्ती 25 ग्राम एवं अमरबेल दोनों को गोमूत्र या बकरी के दूध में पीस कर मल्हम बनाले एवं अंडकोष पर लगाये ।एवं भोजन सादा एवं सुपाच्य ले । लाल मिर्च , तेल , खटाई आदि का सेवन न करे ।इसके साथ ही कब्ज बनाने वाली भोज्य पदार्थो को न खाये ।क्योंकि कब्ज से वायु बनता है और इसे आतं को कष्ट होता है ।इस मल्हम के लेप से कुछ ही दिनों में हर्निया ठीक हो जाता है ।

गुरुवार, 17 मार्च 2016

पेचिश की बिमारी में नीम का सेवन बहुत ही लाभप्रद होता है

पेचिश की बिमारी में नीम का सेवन बहुत ही लाभप्रद होता है


पुरानी से पुरानी पेचिश की बिमारी नीम के सेवन से ठीक हो जाता है ।
   
          पेचिश की बिमारी में पेट में ऐठन होती है ।ऐठन के साथ साथ ऑव आता है ।पेचिश के रोगियों  को पेट ऐठ कर बार बार दस्त लगती है ।आंतो में दर्द होने लगती है ।रोगी को बार बार दस्त होने से कमजोर हो जाता है उसे बचैनी होने लगती है ।आंते खुश्क हो जाते है ।प्रायः वासी भोजन करने या दूषित पानी पीने से पेचिश की बिमारी होती है ।

 इस बिमारी में निम्नलिखित उपचार करें ।

( 1 ) नीम के सफेद छाल को भून कर कूट कर चूर्ण बनाले ।फिर उस चूर्ण को दही के साथ कुछ दिनों तक सेवन करे । पेचिश ठीक हो जायेगी ।

( 2 ) नीम के पांच निबौली को मठ्ठे के साथ पिले पेचिश तुरन्त ठीक हो जायेगी ।

( 3 ) नीम के फूल को सुखा ले । और लगभग 5 ग्राम फूल को मठ्ठे के साथ सेवन करे । पुरानी से पुरानी पेचिश ठीक हो जायेगी ।

बुधवार, 16 मार्च 2016

रक्त चाप ( ब्लड प्रेशर ) के रोगियों के लिए रामबाण है नीम 

रक्त चाप ( ब्लड प्रेशर ) के रोगियों के लिए रामबाण है नीम 

 
संसार में शायद ही कोई औषधि का पेड़ है जो निम् के पेड़ की बराबरी कर पाये । निम् के पेड़ के जड़ से लेकर फुनगी तक औषधि के काम में आता है । नीम के कण - कण में मनुष्य के स्वास्थ्य प्रदान करने के तत्व भरे है । यह रोगों का दुश्मन है । इसके सेवन से रक्त चाप ( हाई ब्लडप्रेशर या लो ब्लडप्रेशर ) ठीक हो जाता है ।

प्रयोग विधि :- यदि व्यक्तो को हाई ब्लडप्रेशर हो तो दो चम्मच नीम के रस को सुबह में खाली पेट देनी चाहिए ।एक सप्ताह के सेवन से ही उच्च रक्तचाप सामान्य अवस्था में आ जाएगा । 

         यदि लो ब्लडप्रेशर हो  तो नीम के तेल से शरीर को अच्छी तरह से मालिश करनी चाहिए । मालिश के एक से दो घण्टे के बाद स्नान करनी चाहिए ।नीम के तेल के प्रयोग के बाद स्नान में साबुन का प्रयोग नही करनी चाहिए ।नीम के तेल से मालिश से शरीर में चिरमिरौटी होती है इसे घबराना नही चाहिए ।कुछ देर बाद अपने आप ठीक हो जाती है । कुछ ही दिनों के मालिश से लो ब्लडप्रेशर सामान्य हो जाता है ।निम् के प्रयोग काल में हल्की भोजन , फल अधिक सेवन करनी चाहिए । अगर दूध ले बराबर पानी मिलाकर दूध ले ।

सोमवार, 14 मार्च 2016

नीम लाख रोगों का एक दवा है 

नीम लाख रोगों का एक दवा है 


यह सत्य है की नीम लाख रोगों का अकेली दवा है ।निम् की हवा हमारे आसपास की वातावरण को शुद्द करती है ।निम् की पत्ती सफेद दाग को स्वभाविक रंग में बदल देती है ।नीम का फूल आँखों के समस्त रोगों को ठीक कर देती है । इसके छाल फोड़े - फुंसी को सुखा देती है ।नीम कै , दस्त , हैजा , मलिरिया , पुराना ज्वर , गठिया , चरम रोग आदि रोगों की अचूक औषधि है ।यह बेजान में जान डाल देती है । नीम के लकड़ी के फर्नीचर बनवाये तो इसमें कभी भी घुन नही लगता । क्योंकि निम् के लकड़ी में प्रोटीन , कैल्शियम , विटामिन ए , एवं गन्धक प्रचुर मात्रा में पाया जाता है । हम नीम के गुणों की बखान करते करते थक जाएंगे पर इसके गुणों की बखान पूरा नही हो पायेगी ।इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को निम् का सेवन प्रतिदिन किसी न किसी रूप में जरूर करनी चाहिये ।कम से कम नीम का दातुन प्रतिदिन जरूर करनी चाहिए ।

रविवार, 13 मार्च 2016

नीम पक्के बालो को काला करता है गंजेपन को दूर कर व्यक्ति को ओजस्वी बनाता है 

नीम पक्के बालो को काला करता है गंजेपन को दूर कर व्यक्ति को ओजस्वी बनाता है 


जो लोग नीम की छाया में बैठना नीम की दातुन करते है , निम् का तेल , पेस्ट , नीम का साबुन आदि का प्रयोग करते है पर प्रतिदिन नीम के कोपल का सेवन नही करते है वो सचमुच बड़ी गलती करते है ।यदि सचमुच निम् के कोपल को प्रतिदिन चबा ली जाय तो शरीर आजीवन रोगों से मुक्त रहेगा ।नीम प्रदूषण को नष्ट करता है । इस कारण नीम के प्रति दिन सेवन से व्यक्ति ओजस्वी बन जाते है । यह रक्त को साफ़ कर देता है ।इसके सेवन से पेट के कीड़े मर जाते है । जब बच्चों को चेचक निकलता है तो निम् के पत्ते से हवा देने पर तीन दिनों में ही चेचक सुख जाता है ।इस दृष्ट्री से निम् की हवा बहुत ही लाभदायक होता है ।

बालो को काला करता है :- कुछ युवको के बाल छोटी उम्र में ही बाल सफेद होने लगते है ।इसलिए उन्हें रोकने के लिए 100 ग्राम भांगरे के रस 50 ग्राम निबौली को भिगोदे । दो दिनों बाद निबौली को रस सहित घोट ले । इस तेल को दिन में तिन बार सुंधे ।इसे कुछ ही दिनों बाद बाल पकना बन्द हो जाएगा । साथ ही नीम के पत्ती को उबाल कर माथे को धोये । इसके एक दो माह के प्रयोग से बाल काले होने लगेंगे ।


गंजे हो जाने पर :- जब बाल धीरे - धीरे उड़ जाते है तो खोपड़ी गंजी हो जाती है ।इसे स्वंय में बड़ी झेप महसूस होती है । गंजेपन दूर करने के लिए नीम के तेल से सर को मालिश करनी चाहिए । बाल कुछ ही दिनों में उगना शुरू हो जाएगा । वैसे निम् का तेल कई बड़ी कम्पनिया बनाती है ।निम् के तेल को आप घर में भी तैयार कर सकते है ।नीम के तेल बनाने की विधि :- 200 ग्राम नीम के तेल में 50 ग्राम निम् के कोपल को पकाये जब तेल पक कर आधा हो जाये तो आग से उतारकर उसे छानकर शीशी में भर कर रख ले ।यह तेल प्रतिदिन 3 से चार माह लगाये उसके बाद खोपड़ी पर बाल उगना शुरू हो जाएगा ।नीम का तेल खोपड़ी पर खाद पानी का काम करता है ।

शनिवार, 12 मार्च 2016

नीम हमारे मुख पर कील मुहांसे को दूर कर हमारे सारे ज्ञान तंतुओ को खोल देती है ।

नीम हमारे मुख पर कील मुहांसे को दूर कर हमारे सारे ज्ञान तंतुओ को खोल देती है ।



            नीम का सीधा प्रभाव हमारे मन मस्तिष्क और इन्द्रियों पर पड़ता है ।इसके सेवन से इंद्री सशक्त हो कर हमें एकाग्रता की ओर ले जाती है । इसका कड़ुआपन मिठास में परिवर्तित हो कर नाड़ियो को साफ़ कर इन्द्रियों को नई ऊर्जा प्रदान करता है ।निम् का सेवन करने से हमारे त्वचा के ऊपर वाले पनपने वाले विजातियो को काट कर हमारे त्वचा को उज्ज्वल बना देता है । यह अनेको प्रकार के बीमारियो को नष्ट कर हमारे आस पास बिमारी फैलने नही देता है ।


    मुख पर कील मुहांसे को दूर करने के लिए निम के प्रयोग विधि :- 


कील मुँहासे अधिकांशतः युवा अवस्था में रक्त के गर्मी के कारण होता है । जब कभी भी कील मुँहासे हो जाए तो इसे नोचना नही चाहिए । इसके लिए सुबह शाम एक चम्मच नीम के रस का सेवन करे इसे रक्त की गर्मी शांत हो जायेगी । और कील मुँहासे ऑख जायेंग एवं नए निकलने भी बन्द हो जायँगे ।

        दूसरी विधि - 10 ग्राम निम् के पती के रस , 10 ग्राम पठानी लोथ , 5 ग्राम अनार के छिलके को सुखाकर कूट पीस ले ।इसके बाद इसको नीम के तेल में मिलाकर किसी शीशी के जार में रख दे ।और जब कील मुहांसे हो तो इस तेल को कील पर लगाये ।कुछ दिनों बाद कील मुहांसे सुख जाएंगे और नए कील निकलना बन्द हो जाएंगे ।



शुक्रवार, 11 मार्च 2016

नाक के विविध रोगों के लिए नीम प्राकृति का चमत्कार है ।

नाक के विविध रोगों के लिए नीम प्राकृति का चमत्कार है ।


नाक के विविध रोगों के लिए निम् प्राकृति का चमत्कार है ।सच में नीम का पेड़ प्रकृति में एक चमत्कार है । हम चमत्कार को नमस्कार करते है । यदि ऐसा नही होता तो हम राम , कृष्ण , बुद्ध आदि की पूजा नही करते । नीम गुणों का पिटारा है । इसकी छाया , इसकी दातुन , इसकी पत्तिया , इसके फल फूल आदि सभी में रोगों को नाश करने की अपार शक्ति भरी है । प्रकृति ने वनस्पतियो में अपार शक्ति प्रदान की है पर निम् में जो शक्ति है वह किसी में नही है । नीम की पत्तिया को पानी में दाल कर औट ले और इस पानी से नहा ले ।आप देखेंगे की आपका महसूस करेंगे की आपका शरीर बहुत हल्का हो गया है ।आगर आपके त्वचा पर हल्ली फुलकी फुंसी हो तो खत्म हो जागेंगे ।स्त्रियां नीम के पानी से नित्य मुँह धोये निश्चित ही चेहरा गुलाब की तरह खिल जाएगा ।

नाक के विविध रोगों में नीम के प्रयोग की बिधि :- 


जुकाम में - जुकाम की बिमारी छोटे - बड़े किसी भी उम्र के व्यक्ति में आम है । इस रोग में 10 पत्ती नीम के , 5 काली मिर्च , 1 अदरख के गाँठ को पानी एक ग्लास पानी में औटें जब पानी आधी रह जाए तो इसे छान कर चाय की तरह पि ले ।3 से 4 खुराक में ही जुकाम ठीक हो जाएगा ।


नकसीर फूटना - गर्मी के दिनों में दिमाग में गर्मी का प्रभाव ज्यादा हो जाता है तो नाक से खून बहने लगता है ।जिसे हम नकसीर फूटना कहते है । जिसे वयक्ति घबड़ा जाता है ।इसके लिए निम्न प्रयोग करे ।


( 1 ) नीम के अंदर वाले छाल को पीस कर सर पर लेप करे खून आना बन्द हो जायेगा ।

( 2 ) नीम के कोपल को पीस कर कनपटी और माथे पर लेप करे नाक से खून आना बन्द हो जायेगा ।

(3 ) अक्सर गर्मी के दिनों में ही नाक से खून आता है इसलिए जी बच्चे को या व्यक्ति को नाक से खून आता है उन्हें नीम के पत्तियो का रस को चीनी के शर्बत के साथ पीना चाहिए जिसे दिमाग पर गर्मी का असर करेगा ही नही और नाक से खून आएगा ही नही ।

बुधवार, 9 मार्च 2016

नीम रोम -रोम को शीतलता प्रदान करने के साथ साथ आँखों के रोगों का अचूक औषधि है ।

नीम रोम -रोम को शीतलता प्रदान करने के साथ साथ आँखों के रोगों का अचूक औषधि है ।

नीम की सबसे बड़ी बिशेषता यह है की यह रोगो के गर्दन पर सीधी छुरी चलाती है ।आधा रोग तो नीम के नाम सुनते ही भाग जाता है ।जब हम उसके छाया में बैठ कर जो शीतलता महसुस करते है तो खाने के बाद कैसा अनुभव करेंगे ? जिन लोगो को निम् के नाम से मुँह कडुवा बनाया है उन्हें इसे एक बार खाकर जरूर देखना चाहिये ।यह भीतर से कडुआ नही मिथ होता है ।

आँखों के रोगों के उपचार के विधी :-

आँख दुखना - आँखो में धूल आदि चले जाने के कारण आँख आ जाती है आखे लाल हो जाती है आखो से पानी आने लगता है । कभी कभी सर्दी - गर्मी के प्रभाव से भ आखे दुखने लगते है । आयुर्वेद में इसके उपचार के लिए निम्न उपचार बताया गया है ।


(1) नीम के पत्ते को अच्छी तरह से साफ़ करके उसके एक से दो बून्द रस आँखों में टपकाना चाहिए इसे शरु में तो आहो में लगेगा पर कुछ ही क्षणों के बाद आँखों को ठंडक महसूस होगी ।

(2 )यदि बच्चों की आँख आ गई ही तो उसके कानो में एक से दो बून्द नीम के रस डाले ।यदि बायीं आँख दुःख रही हो तो बायीं तरफ के ही कान में रस डाले । इसे दो तीन दिनों में ही आखो की लाली कट जायेगी । आखो से पानी आना ठीक ही जाएगा ।

आँखों की जलन :- आँखों में जलन धुप , सर्दी ,सर में दर्द या अधिक ठन्डा पदार्थ खाने से हो जाता है । लगता है की आंखो में कोई मिर्च लगा दिया हो ।  आँख लाल हो गया हो । इस अवस्था में रोगी को मिर्च , खट्टा , ठंडे पदार्थ का सेवन नही करनी चाहिए ।

 प्रयोग विधि :-

( 1 ) नीम की पट्टी के रस में थोड़ी से पठानी लोध मिलाकर लेप बनाकर आँखों के पलको पर लगाये । इसे आँखों का जलन  एवं लाली शीघ्र  नष्ट हो जायेगी ।


रतौंधी रोग में :-कच्ची निबौली का दूध चांदी के सलाई से लगाये इसे रतौंधी कट जायेगी ।निम् के तेल भी आँख में लगाने से रतौंधी में काफी लाभ होता है ।


मोतियाबिंद में :- थोड़ी से निबौली को सुरमे की तरह पीस ले । फिर प्रतिदिन रात को सलाई के कांटी से आँख में अंजन की तरह  लगाये । इसे मोतियाबिंद की जाल कट जाएगा ।


आंखो से कम दिखाई देना :-विटामिन ए एवं विटामिन सी की कमी से आँखों की रौशनी कम हो जाती है ।इसके लिए भिजन में पर्याप्त मात्रा में टमाटर , पपीता ,  हरी सब्जी आदि लेनी चाहिए । निम् के सेवन से भी इस कमी को दूर की जा सकती है । नीम के दस ग्राम फूल में  पांच ग्राम कलमीशोरा लेकर उन्हें सुर्मा बनाले । फिर चांदी की सलाई से आँखों में सुबह शाम लगाये । इसे धीरे धीरे आंको की रौशनी आजायेगी ।





सोमवार, 7 मार्च 2016

नीम कान के रोगों का अचूक औषधि है ।

नीम कान के रोगों का अचूक औषधि है ।


नीम अमृत का दूसरा नाम है ।यह रोगों को सोख कर मनुष्य को दीर्घजीवी बनाता है ।नीम में अमृत के इतने गुण है की यह रोते को हंसा देती है और मरते को जीवित कर देती है ।यह वात - कफ साफ़ कर शरीर को निरोग कर देती है ।यह रक्त को धोती है । दाद खुजली का समूल नष्ट कर देती है ।पेट के कीड़े को मार देती है । नीम के पत्ते से अनाज में कीड़े नही लगते । कपड़े में इसके सूखे पत्ते रख दे तो कपड़े में कीड़े नही लगते ।इसमें इतने अधिक गुण भरे है की इसका बर्णन करना मुश्किल है । निम कमजोर को ताकतवर बना देता है । जो लोग सैकड़ो दवा खाकर निराश हो गए है वे लोग जरूर नीम के शरण में जाय ।यह निस्तेज को स्तेज बना देती है । आयुर्वेद में नीम एक ऐसी औषधि है जो सर्वगुण सम्पन्न है ।
 

 नीम द्वारा कान के रोगों के उपचार की विधि :-  


(1 ) कर्णशूल में :- इस रोग में कान में बहुत ही तेज दर्द होता है ।इसे दबाने से रोग और ही बढ़ जाता है । कच्ची निबौली की बिज को टिल के तेल में पक्का ले फिर इसमें फुलाया हुआ नीलाथोथा मिलाले इस तरह यह एक प्रकार से मल्हम सा हो जाएगा ।इस मल्हम को लगाने से कर्णशूल ठीक हो जाता है ।

( 2 ) कान के दर्द में - कान के अंदर मैल जम जाने के कारण , धूल चल जाने के कारण , कभी - कभी खुश्की के कारण कान में दर्द होने लगता है । इसके लिये नीम से बहुत ही कारगर उपचार किया जा सकता है ।
 प्रथम विधि - निम के पत्ता 25 ग्राम तथा नीलाथोथा ( तूतिया ) दोनों को पीस कर तील के तेल में गर्म कर ले उसके बाद कपड़े से तेल को छान कर शीशी में रख ले ।उसके बाद सलाई के कांटी में रुई भिगो कर कान में लगाये । या रात को कान साफ़ करके दो बून्द डाले ।इसे नींद भी अच्छी आएगी ।और दो से तिन दिन में कान का दर्द बिलकुल ठीक हो जाएगा ।
दूसरी विधि - नीम के निबौली को सरसो के तेल में डाल औंट ली ।ठंडा हो जाने के बाद कान में दो दो बून्द डाले । दर्द बहुत ही जल्द ठीक हो जायेगा ।



( 3 ) कान में कीड़े का प्रवेश - कान में यदि कीड़ा चला गया हो तो निम के पत्ती की रस को गुनगुना कर कान में दो बून्द डाले ।इसे कीड़ा मर जायेगा ।
बाद में इसे सलाई से कीड़े को निकाल दे ।



( 4 ) कान के बहने पर - कान प्रायः बच्चों के बहने लगते है । जब कभी बच्चों को दांत निकलता है , मौसम बदलता है सर्दी - गर्मी के प्रभाव से कान बहने लगता है । या कान में फुंसी निकल गया हो या कान में मवाद भर गया हो । तो सरसो के 100 ग्राम तेल में 20 से 30 निम् के पत्ति डाल कर आग पर धीमी आंच में पकाये उसके बाद उसमे पिसी हुई थोड़ी से हल्दी डाल कर कुछ देर रहने दे । जब तेल ठंडा हो जाय तो तेल को छान क्र शीशी में भर ले । इस तेल को प्रतिदिन कान को साफ़ कर कान में डाले ।इसे कान का बहना रुक जाएगा ।
   
दुसरी विधि - निम् के तेल में थोड़ी सी शहद मिला कर कान में लगाये ।इसे कान का बहना रुक जाएगा साथ ही दुर्गन्ध भी दूर हो जाएगा ।

 ( 6 ) कान का सुन्न पड जाना - कान प्राय उनक आवाज      ,बन्दूक या पटाखे के आवाज , अत्यधिक चिंता या नशा का सेवन जैसे शराब , अफीम स्मैक आदि से कान सुन्न हो जाते है । इसके लिए नीम के पत्ती के रस को कान में डाले ।और चार पांच पती चबाले ।इसे कुछ ही दिनों में कान का सुन्न पड़ना ठीक हो जायेगा ।

रविवार, 6 मार्च 2016

नपुसंकता को दूर करता है नीम

 


नपुसंकता को दूर करता है नीम  

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 नीम इतनी बढ़िया चीज है की इसका सीधा प्रभाव हमारे मन , मस्तिष्क और इन्द्रियों पर पड़ता है ।इसके सेवन से इन्द्रियाँ सशक्त होकर हमे एकाग्रता की और ले जाती है ।यदि स्वस्थ व्यक्ति भी इसका सेवन करता है उसे रोग दूर ही रहता है ।नीम का रेशा - रेशा हमारे शरीर में पहुच कर हमारे आंतो में घुस कर नाड़ियों को साफ़ कर देता है ।इस प्रकार नीम का कड़ुआपन मिठास में परिवर्तन होकर हमारे नाड़ियों को साफ कर देता है । नीम को खाने से त्वचा के सारे रोगों को दूर कर देता है ।यह बिलकुल सच है कि नीम अनेको प्रकार के रोगो को नष्ट कर देती है ।आस - पास भी बिमारी फैलने नही देती ।नीम के सेवन से इंद्री मजबूत हो जाती है ।नपुंसकता दूर हो जाती है साथ ही सेक्स पावर को बढ़ा देता है ।नपुंसकता आम रोग नही है इसलिय जब कभी नपुंसकता की आभास होतो निम् की सेवन जरूर करनी चाहिए ।

 


 नपुंसकता दूर करने की प्रयोग बिधि :-


 (1) दो चम्मच नीम के रस सुबह सेवन किया जाय तो नपुंसकता दूर हो जाती है साथ ही पौरुष बल बढ़ जाती है ।
(2) नपुंसकता विरोधी तेल से भी रोगी को बहुत फायदा होता है । बनाने की आसान विधि - 100 ग्राम नीम के छाल , 100 ग्राम बेल के छाल , नगरमोथा 100 ग्राम , त्रिफला 100 ग्राम ' आँवला 2 किलो , गिलोय 2 किलो सब को कूट पीस कर तील के 500 ग्राम तेल में पकाये ।जब आधा रह जाए तो इसे आग से उतार कर ठंडा कर कपड़ा से छान कर बोतल में भर ले । सुबह शाम इस तेल से इंद्री को मालिश करे । 10 से 15 दिनों में ही लिंग में कड़ापन आने लगेगा । इस तेल को लगाने के बाद पानी से न धोये ।

शनिवार, 5 मार्च 2016

कान के रोगों का अचूक औषधि - नीम



नीम कान के रोगों का अचूक औषधि है । 


नीम अमृत का दूसरा नाम है ।यह रोगों को सोख कर मनुष्य को दीर्घजीवी बनाता है ।नीम में अमृत के इतने गुण है की यह रोते को हंसा देती है और मरते को जीवित कर देती है ।यह वात - कफ साफ़ कर शरीर को निरोग कर देती है ।यह रक्त को धोती है । दाद खुजली का समूल नष्ट कर देती है ।पेट के कीड़े को मार देती है । नीम के पत्ते से अनाज में कीड़े नही लगते । कपड़े में इसके सूखे पत्ते रख दे तो कपड़े में कीड़े नही लगते ।इसमें इतने अधिक गुण भरे है की इसका बर्णन करना मुश्किल है । निम कमजोर को ताकतवर बना देता है । जो लोग सैकड़ो दवा खाकर निराश हो गए है वे लोग जरूर नीम के शरण में जाय ।यह निस्तेज को स्तेज बना देती है । आयुर्वेद में नीम एक ऐसी औषधि है जो सर्वगुण सम्पन्न है ।

 नीम द्वारा कान के रोगों के उपचार की विधि :-


 (1 ) कर्णशूल में :- इस रोग में कान में बहुत ही तेज दर्द होता है ।इसे दबाने से रोग और ही बढ़ जाता है । कच्ची निबौली की बिज को टिल के तेल में पक्का ले फिर इसमें फुलाया हुआ नीलाथोथा मिलाले इस तरह यह एक प्रकार से मल्हम सा हो जाएगा ।इस मल्हम को लगाने से कर्णशूल ठीक हो जाता है । 

( 2 ) कान के दर्द में -कान के अंदर मैल जम जाने के कारण , धूल चल जाने के कारण , कभी - कभी खुश्की के कारण कान में दर्द होने लगता है । इसके लिये नीम से बहुत ही कारगर उपचार किया जा सकता है । 

 प्रथम विधि - निम के पत्ता 25 ग्राम तथा नीलाथोथा ( तूतिया ) दोनों को पीस कर टिल के तेल में गर्म कर ले उसके बाद कपड़े से तेल को छान कर शीशी में रख ले ।उसके बाद सलाई के कांटी में रुई भिगो कर कान में लगाये । या रात को कान साफ़ करके दो बून्द डाले ।इसे नींद भी अच्छी आएगी ।और दो से तिन दिन में कान का दर्द बिलकुल ठीक हो जाएगा । 

दूसरी विधि - नीम के निबौली को सरसो के तेल में डाल औंट ली ।ठंडा हो जाने के बाद कान में दो दो बून्द डाले । दर्द बहुत ही जल्द ठीक हो जायेगा ।


 ( 3 ) कान में कीड़े का प्रवेश - कान में यदि कीड़ा चला गया हो तो निम के पत्ती की रस को गुनगुना कर कान में दो बून्द डाले ।इसे कीड़ा मर जायेगा । बाद में इसे सलाई से कीड़े को निकाल दे । 


 ( 4 ) कान के बहने पर -कान प्रायः बच्चों के बहने लगते है । जब कभी बच्चों को दांत निकलता है , मौसम बदलता है सर्दी - गर्मी के प्रभाव से कान बहने लगता है । या कान में फुंसी निकल गया हो या कान में मवाद भर गया हो । तो सरसो के 100 ग्राम तेल में 20 से 30 निम् के पत्ति डाल कर आग पर धीमी आंच में पकाये उसके बाद उसमे पिसी हुई थोड़ी से हल्दी डाल कर कुछ देर रहने दे । जब तेल ठंडा हो जाय तो तेल को छान क्र शीशी में भर ले । इस तेल को प्रतिदिन कान को साफ़ कर कान में डाले ।इसे कान का बहना रुक जाएगा । दुसरी विधि - निम् के तेल में थोड़ी सी शहद मिला कर कान में लगाये ।इसे कान का बहना रुक जाएगा साथ ही दुर्गन्ध भी दूर हो जाएगा ।

 ( 5 ) कान का सुन्न पड जाना -कान प्राय उच्ची आवाज , बन्दूक या पटाखे के आवाज , अत्यधिक चिंता या नशा का सेवन जैसे शराब , अफीम स्मैक आदि से कान सुन्न हो जाते है । इसके लिए नीम के पत्ती के रस को कान में डाले ।और चार पांच पती चबाले ।इसे कुछ ही दिनों में कान का सुन्न पड़ना ठीक हो जायेगा ।

गुरुवार, 3 मार्च 2016

नीम् के गुण -नीम धरती का अमृत है ।


नीम के गुण , नीम एक इसके फायदे अनेक है ।



यह रोगों का दुश्मन है । इसके महत्व का जीतना वर्णन किया जाय कम ही है ।नीम का पेड़ पुरे भारत में पाया जाता है । नीम के पेड़ को प्रकृति ने आधा बैध बनाया है ।यह ठण्डी है और गर्म भी ।इसके खाने से वयक्ति का शरीर कंचन सा हो जाता है ।इसके सेवन करने वाले से रोग दूर रहता है ।निम खाने में कड़वा पर गुणों में मीठा होता है ।वैसे भी देखा गया है की जो लोग कड़वे बोलते है उनमे से अधिकाँश लोग अंदर से परोपकारी , दयालु , निःस्वार्थी और दिल के सच्चे होते है ।निम के पेड़ के साथ भी कुछ ऐसा ही है । नीम को संस्कृत में निम्ब कहते है यानी की ' निम्बति - स्वास्थ्यं ददाति ' जो शरीर को निरोग कर दे वह निम्ब है । नीम के अनेको फायदे है ।इनका प्रयोग बिमारी के लक्ष्णों के अनुसार किया जाता है । निम के जड़ ' पत्ते , टहनी , फले , इसके छाल ये सारे मानव के रोगों को दूर करने के काम में आते है । नीम के दातुन दांतो के प्रत्येक रोगों को नष्ट कर देती है ।जो लोग नियमित नीम के दातुन का प्रयोग करते है उनके पास किसी भी प्रकार के दांतो का रोग भटक ही नही सकता । इसके पत्तियां और निबौलिया शरीर में रक्त को शुद्द करके खून को ताजा बनाती है ।इसके फूल आँखों को ठंडक पहुचाती है ।इसके छाल घाव को सोख लेती है ।जिन लोगो के पास महंगे इलाज कराने में सक्षम नही उन्हें नीम का इलाज जरूर करना चाहिए । इसी कारण से अनेक बिद्वानो ने निम् को गरीबो का आँख बताया है ।नीम का प्रयोग शरीर को ठंडक प्रदान करता है , ताजा बनाता हैं , शरीर को सुगन्ध और सौंदर्य से भर देता है ।निम का अर्थ ही है कि आँखों को ठंडक पहुचाओ ।ईश्वर ने नीम में हजारो गुण प्रदान किये है ।इसकी जितनी प्रशंसा की जाय कम हैं ।

मंगलवार, 1 मार्च 2016

गोखरू ( small caltrap ) , नामर्दी , पथरी , हिर्दय रोग , खांसी , रक्त - पित को नष्ट कर देता है ।



गोखरू ( small caltrap ) नामर्दी , पथरी , हिर्दय रोग , खांसी , रक्त - पित को नष्ट कर देता है ।

यह पूरे भारत में पाया जाता है ।गोखरू ऊसर जमीन पर अपने आप उगने वाला पौधा है ।गोखरू को संस्कृत में - गोक्षुर , हिंदी में - गोखरू , मराठी में - सराठे , तेलगु में - पात्तेरुमुल्लु , तमिल में - नेरनजी , लैटिन में - ट्रिबुल्स टेरेस्ट्रिस कहते है । गोखरू के पौधे चने के पौधे की तरह दीखता है । इसकी टहनी और तना सफेद रोमो से युक्त होता है ।इसकी जड़े 5-6 इंच लम्बे , इसकी पत्तिया 3 इंच तक लम्बी होती है ।इसके फूल जादी में होती है जो पांच पंखुड़ी वाली हल्के पिले रंग के होते है ।जिसमे छोटे छोटे कांटे होते है ।गोखरू के फल में पांच कोष्ठ होते है इसमें अनेक बिज होते है । गोखरू स्वाद में मीठा , भारी , अनुमोलन , रसायनिक और शीतल होता है । यह बलबर्द्धक , वाट - पितनाशक , और आमाशय को बल देने वाला होता है । यह प्रमेह , नामर्दी , पथरी , दाह , ह्रदय - रोग , आदि को नष्ट कर देता है ।

 इसके प्रमुख लाभ :- 


 ( 1 ) गोखरू के 3 से 4 ग्राम चूर्ण को शहद में मिलाकर सुबह शाम चाटे और ऊपर से एक छोटी ग्लास भेड़ के दूध पीले । इस तरह सात आठ दिनों में पथरी गल कर निकल जायेगी । दूसरी विधि एक लीटर पानी में 50 ग्राम गोखरू को मोटा कूट कर उबाले जब आधा रह जाए टी इसमें 50 ग्राम मिश्री और 10 ग्राम यवक्षार की मिला कर उसका कुल चार मात्रा बनाले और उसे सुबह दोपहर शाम और रात को दे ।इस तरह कुछ दिनों के प्रयोग से पथरी गल कर निकल जायेगी ।

 ( 2 )सुजाक के जलन में :- गोखरू के हरे पत्ते 10 ग्राम , ककड़ी के बिज 6 ग्राम और काली मिर्च 2 ग्राम इन सब को घोट कर पिने से सुजाक के कारण होने वाली जलन ठीक हो जाती है ।

( 3 ) स्वप्नदोष में :- 50 ग्राम गोखरू के फल को सुखा ले ।फिर 50 ग्राम मिश्री के साथ पीस कर सुबह शसम 3 से 4 ग्राम की मात्र में ले ।स्वप्नदोष ठीक ही जाएगा ।    
( 4 ) पुरुषो में सेक्स पावर को बढ़ाने एवं बल वीर्य - बृद्धि के लिए - (a) 50 ग्राम गोखरू के चूर्ण , 50 ग्राम शनतावर के चूर्ण को कूट कर 250 मिली दूध और 250 ग्राम पानी में उबाले जब जल कर आधी हो जाए तो उसे आग से उतारकर कपड़े से छान कर शहद या मिश्री के साथ पीयें ।एक से डेढ़ माह में मर्दानी ताकत और बल बीर्य में बृद्धि हो जायेगी ।