रविवार, 14 फ़रवरी 2016

स्त्रियों के रक्त प्रदर में अडूसा एक चमत्कारी औषधि है


स्त्रियों के रक्त प्रदर में अडूसा चमत्कारी औषधि है । अडूसा ( Malabar nut tree ) के गुण  


 अडूसा एक चमत्कारी औषधि है । अडूसा का पौधा छोटा और अनेक शखाओ वाला झाड़ीनुमा होता है ।इसका तना मजबूत होता है । पत्तिया 5 से 7 इंच लम्बी और 2 से 3 इंच तक चौड़ी और आगे की ओर नुकीली होती है ।इसमें सफेद रंग के फूल गुच्छो के रूप में शरद ऋतू में आते है ।इसका फल आगे से मोटा व पीछे से चपटा और चार बिज वाला होता है । 

संस्कृत में - वासक , बाजदन्त । मराठी में- अडुलसा ।बंगाली में- वाकस ।गुजराती में - आडुशो । फ़ारसी में - ख्वाजा ।हिंदी में अडूसा । और लैटिन में - अधाटोडा वासिका कहते है ।
 यह पूरे भारत में खण्डहरों , नदी - तलाबो , सुनसान इलाको में स्वंय उग आता है । यह मुख्य रूप से यह हिमालय के पास तराई वाले इलाको बिहार , उत्तर प्रदेश , बंगाल , मध्य भारत में पाये जाते है । अडूसा कसैला , लघु , स्वर व ह्रदय को हितकर , कफ - पित , रक्त पित्त , कृमी , क्षय रोग , ज्वर , प्रमेह , रक्त विकार और कमला का नाश करने वाला होता है । इसके पत्ते छाल कब्ज , अजीर्ण , खांसी , प्रसूता के कष्ट में लाभकर होता है ।

 प्रमुख फायदे :- 

(1 ) सर दर्द - अडूसा के थोड़ी सी सुखी पत्ती को पानी में डाल कर उबाले जब पानी उबल जाय तो उसमे आवश्यकतानुसार दूध और चीनी डाल कर चाय बनाले । और छान कर पी ले । इस तरह सुबह शाम चाय पिने से अकसर सर दर्द होने वाला या बना रहने वाला सिरदर्द ठीक हो जाता है । 

 ( 2 ) खांसी - अडूसा के पत्ते का अर्क निकाल कर इसमें जरा सा नमक दाल कर गुनगुना क्र पिये ।इसे खांसी मिट जाती है 

 ( 3 ) जुकाम - अडूसा के एक कप चाय में पिसी हुई काली मिर्च 1 चुटकी , पिसी मिश्री एक चम्मच , और एक चम्मच शहद मिलाकर प्रतिदिन सुबह शाम ले इसे जुकाम समाप्त हो जाता है ।

 ( 4 ) मुँह के छाले - एक लीटर पानी में अडूसा के 20 ग्राम पत्ता और 20 ग्राम जड़ के छाल को दाल कर उबाले । उबल जाने के बाद जितना शन हो जाय उतना गर्म पानी से दिन में तीन चार बार कुल्ला करने से मुँह के छाले ठीक हो जायेंगे ।

 ( 5 ) टी.बी. की खांसी - अडूसे की कोमल व ताजा पत्तियां लेकर अपने हाथो से मसलकर किसी चौड़े मुख के कांच के वर्तन में डाल दे । पत्तियो से दोगुनी चीनी भी दाल कर उसे खूब हिला डोला कर कपड़े से वर्तन का मुंह बन्द कर लगभग 45 दिनों तक धुप में रखे । ततपश्चात इस अडूसे के गुलकन्द को सुबह शाम एक चम्मच ले इसे टी.बी. रोगी का खांसी एवं पुरानी से पुरानी खांसी ठीक हो जाती है ।

 ( 6 ) रक्त - पित्त - 10 ग्राम अडूसे के पत्ते के रस के साथ 5 ग्राम चीनी मिलाकर 2 से 3 बार चाटने पर शर्तिया रक्त - पित्त मिट जाता ।

 ( 7 ) फोड़ा - फोड़ा निकलना शुरू ही हुआ हो तो उस पर अडूसा के पत्ते को पीस कर लेप लगाने से फोड़ा बैठ जाता है । ( 8 ) स्त्रियों में रक्त प्रदर - 10 ग्राम अडूसे के पत्ते का रस और 10 ग्राम मिश्री को मिलाकर रोजाना 3 से 4 बार लेने से स्त्रियों का रक्त प्रदर 7 से 8 दिनों में समाप्त हो जाता है ।

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